You are currently viewing गायत्री मन्त्र एवं उसका अर्थ

गायत्री मन्त्र एवं उसका अर्थ

कृपया शेयर करें -

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

भावार्थ –

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

जप करने की विधि – शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ मंत्र है। इस मंत्र का जप सुबह सूर्योदय से कुछ पहले शुरू करना चाहिए। दोपहर में भी गायत्री मंत्र का जप किया जा सकता है। शाम को इस मंत्र का जप सूर्यास्त से कुछ पहले शुरू करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप इस मंन्त्र का जाप मन ही मन कभी भी कर सकते हैं।

गायत्री मंत्र का जाप करने के लाभ –

  • किसी भी प्रकार की परेशानी दूर करता है।
  • चेहरे की चमक (तेज) बढ़ाता है।
  • पढ़ाई में मन लगने लगता है।
  • दरिद्रता का नाश करता है।
  • शत्रुओं पर विजय।
  • रोग निवारण।
अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर या कॉमेंट जरूर करें।
(कुल अवलोकन 935 , 1 आज के अवलोकन)
कृपया शेयर करें -