उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है।
जो जागत है सो पावत है, जो सोवत है सो खोवत है।।
टुक नींद से अखियाँ खोल जरा, और अपने प्रभु से ध्यान लगा।
यह प्रीति करन की रीति नहीं, प्रभु जागत है तू सोवत है ।।
जो कल करना है आज कर ले, जो आज करना है अब कर ले।
जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया, फिर पछताये क्या होवत है।।
नादान भुगत करनी अपनी, ओ पापी पाप में चैन कहाँ।
जब पाप की गठरी सीस धरी, फिर सीस पकड़ क्यों रोवत है ।।
अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर या कॉमेंट जरूर करें।
(कुल अवलोकन 1,259 , 1 आज के अवलोकन)